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Showing posts from April, 2021

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व:-

"भारतीय नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् की आप सभी को हार्दिक बधाई  एवं शुभकामनाएँ ।  चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व:-   1.इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की। 2.सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है। 3.प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है।   4.शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन यही है।  5.सिखो के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस  है।   6.स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं कृणवंतो विश्वमआर्यम का संदेश दिया | 7.सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार भगवान झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए। 8.विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना। विक्रम संवत की स्थापना की । 9.युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ। 10 संघ संस्थापक प पू डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म दिन । 11 महर्षि गौतम जयंती  -----...

किश्तवाड़ वीरों की धरती से एक और पुष्प माँ भारती के चरणों मे चढ़ गया।।

।।किश्तवाड़ वीरों की धरती से एक और पुष्प माँ भारती के चरणों मे चढ़ गया।। आज 9 अप्रैल किश्तवाड़ के इतिहास का एक और काला दिन। परिहार बन्धुओं के बलिदान को अभी छः महीने भी नहीं बीते थे कि छह महीने के भीतर ही एक बार फिर किश्तवाड़ वासियों के ऊपर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा था, एक बार फिर सब की आंखों से आंसू बह रहे थे। सब के अंदर गुस्सा था, बदले की आग थी बदला उन आतंकवादियों से, बदला उन लोगों से जो इन आतंकवादियों को पनाह दे रहे थे जिन्होंने 6 महीने के अंदर-अंदर एक बार फिर अपनी मजूदगी दिखाते हुए भारत माता के सपूत चंद्रकांत शर्मा जी को शहीद कर दिया था। यह गुस्सा उस ज़िला प्रशासन के खिलाफ भी था जो हर बार की तरह इस बार भी मूक दर्शक की तरह बैठा था। जिस हॉस्पिटल में वो अपनी सेवाएं देते थे दूसरों के कष्ट दूर करते थे उनको नई जिंदगी देते थे आज उस ही हॉस्पिटल में वो खुद शहीद हो जाएंगे शायद ही किसी ने सोचा होगा। हर दिन की तरह आज भी सुबह घर से तैयार होकर वो हॉस्पिटल पहुँचे लेकिन किस को पता था कि यह उनकी ज़िंदगी का आखिरी दिन है क्योंकि पहले से ही वहां पर 3-4 आतंकवादी घात लगाए उनके इंतेज़ार में बैठे थे। जैसे ही चंद्र...